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Didi की सैर — मुझे अपने बैंडेज पर गर्व क्यों है

💡 यह कहानी है —
Didi के गाल पर हमेशा एक बैंडेज चिपकी रहती है। "इसे उतारते क्यों नहीं?" — यह सवाल उसे बार-बार सुनना पड़ता है, लेकिन Didi बस मुस्कुराकर आगे बढ़ जाती है।
एक सुहावनी-हवा वाले दिन सैर करते हुए Didi को बचपन की एक याद आती है — वो दिन जब वो ठोकर खाकर खूब रोई थी, और दो गर्म हाथों ने उसके गालों को थाम लिया था।
Didi के साथ धीरे-धीरे चलते हुए जानो — वो बैंडेज क्यों नहीं उतारती।

हवा की मीठी थपकी वाले दिन, सैर पर निकली

धूप से नहाई हुई सैर की राह पर Didi धीरे-धीरे कदम बढ़ाती है

दोपहर का खाना तो बढ़िया खाया — फिर घर के सामने सैर पर निकल आई।

आज सैर करते-करते थोड़ा अपने बारे में बताऊँगी, Didi के बारे में।

कोई खास बात नहीं… फिर भी आज दिल कर रहा था कहने का।

दोपहर में बहुत ज़्यादा खाना खा लिया। हिहि, Halme के हाथ का खाना हो तो रुका ही नहीं जाता।

इसलिए ज़रा पाचन के लिए निकली। नहीं तो बस नींद आने लगती है।

न गर्म न ठंडी — बस हल्की-सी हवा के दिन Didi जंगल की पगडंडी पर बड़े-बड़े कदम रखती है

न गर्मी, न सर्दी — बस नाक को गुदगुदाती ऐसी हवा।

ऐसे दिनों में मन खुश होता है, और कदम खुद ब खुद बड़े-बड़े पड़ने लगते हैं।

धम, धम, धम।


"गाल पर बैंडेज क्यों लगाए घूमती हो?"

पत्थरों वाले रास्ते पर एक-एक कदम ठीक से रखती Didi की पीठ

पत्थरों वाले रास्ते पर चल रही थी, तभी सामने से आ रहे दुकान के चाचाजी रुक गए और मुझे देखने लगे।

पत्थरों वाले रास्ते पर किसी के सवाल पर एक पल के लिए रुकी Didi

"बेटी, पिछले हफ्ते भी और अब भी — गाल पर बैंडेज क्यों लगाए हो?"

…यह सवाल मुझे अक्सर सुनना पड़ता है। सच कहूँ तो लगभग हर बार।

सैर पर भी, दुकान में भी, कभी-कभी लिफ्ट में भी। हाहा।

तब मैं बस "ऐसे ही, अच्छी लगती है~" कहकर आगे बढ़ जाती हूँ।

गाल पर बैंडेज लगाए Didi आत्मविश्वास से आगे बढ़ती है

लेकिन आज चलते-चलते पुरानी बातें बार-बार याद आने लगीं।

उतारती क्यों नहीं? सच में सिर्फ अच्छी लगती है इसलिए?

हम्म… वो भी सही है। पर, क्या बात है — कदम धीरे पड़ने लगे।


सोचने लगूँ तो कदम धीमे हो जाते हैं

ऊँचे-ऊँचे पेड़ों के बीच से धूप छनती जंगल की राह पर Didi धीरे-धीरे चलती है

एक बार सोचने लगूँ तो मेरे कदम खुद ब खुद धीमे हो जाते हैं — यह मेरी आदत है।

धीरे-धीरे चलते हुए, मैंने उँगली से गाल की बैंडेज को हल्के से थपथपाया।

उकडूँ बैठकर गाल की बैंडेज को उँगली से धीरे-धीरे छूती Didi

याद आया — वो उस वक्त की बात थी।

जब मैं बहुत-बहुत छोटी थी। अभी से कहीं ज़्यादा छोटी।


पत्थर से ठोकर खाकर खूब रोई उस दिन

बचपन में पत्थर से ठोकर खाकर अचानक गिरती छोटी-सी Didi

पत्थर से ठोकर लगी और धड़ाम से गिर गई। आह!!

घुटना भी छिल गया, गाल भी छिल गया। मैं बहुत ज़ोर से रोई — सच में बहुत।

आँखों में आँसू भरे Didi के दोनों गालों को गर्म हाथ थाम लेते हैं

तभी गर्म हाथ आए।

दोनों गालों को थाम लिया, फू-फू करके फूँका, और यहाँ एक बैंडेज चिपका दी।

"अब ठीक हो गया।"

वो हाथ सच में बहुत गर्म थे। …माँ के हाथ।


बोझ न छोड़ने वाली चींटी दिखी

पेड़ की जड़ के पास कतार में जाती चींटियों को उकडूँ बैठकर देखती Didi

अरे। एक चींटी।

पेड़ के नीचे चींटियाँ लाइन बनाकर जा रही थीं।

एक चींटी अपने से भी बड़ी चीज़ उठाए जा रही थी — अरे वाह!! यह कैसे उठा लेती है?

थोड़ी देर उकडूँ बैठकर देखती रही। चींटी ने रखा ही नहीं।

भारी होगी ना। अरे? नहीं रखी। आखिर तक?

ओह।

पत्तों के बीच से छनती धूप को देखते हुए Didi के चेहरे पर एक समझ आती है

मैं भी तो ऐसी ही हूँ।

मैं उठी और फिर चलने लगी।

गाल पर हाथ लगाया। बैंडेज थी। हमेशा थी।


इसीलिए नहीं उतारती

गाल की बैंडेज को एक बार फिर धीरे से छूते हुए मुस्कुराती Didi

हाँ, इसीलिए नहीं उतारती।

जब मैं गिरी थी, तब किसी ने मुझसे कहा था — "अब ठीक हो गया।"

वो बात यहाँ इस तरह चिपकी हुई है।

तो उतारने की कोई वजह नहीं।

चौड़ी मुस्कान के साथ हाथ हिलाती Didi

नहीं उतारूँगी। यह मेरा गर्व है।

हिहिही~

फिर से बड़े-बड़े कदम रखते हुए सैर की राह पर दूर जाती Didi की परछाईं

मैंने फिर से बड़े-बड़े कदम रखे।

धम, धम, धम।

हवा पहले से थोड़ी और अच्छी हो गई थी।


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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. Didi गाल की बैंडेज क्यों नहीं उतारती?

Didi के लिए बैंडेज सिर्फ एक घाव ढकने वाली चीज़ नहीं है। जब वो छोटी थी और गिरकर रोई थी, तब उसकी माँ ने दोनों गाल थाम लिए और कहा था — "अब ठीक हो गया।" वो गर्म स्पर्श और वो प्यार भरे शब्द उस बैंडेज में समाए हुए हैं। इसीलिए Didi इसे अपना गर्व मानती है और उतारती नहीं।

Q. यह कहानी बच्चे को क्या सिखाती है?

प्यार की यादें आँखों से दिखती नहीं, लेकिन दिल में हमेशा के लिए रहती हैं — यही यह कहानी बताती है। जैसे Didi को चींटी देखकर अपनी बात समझ आती है, वैसे ही बच्चे भी महसूस कर सकते हैं कि प्यार से मिली यादें उन्हें हमेशा ताकत देती हैं।

Q. WAGZAK JUMP में Didi जैसे और किरदार मिलते हैं?

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आज की सैर यहीं खत्म! अगली बार फिर एक मज़ेदार कहानी लेकर आऊँगी। — Didi

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