Didi स्नैक खा रही थी कि उसके पेट से बार-बार "गुड़गुड़" की आवाज़ आने लगी।
आवाज़ का मालिक ढूँढ़ने के लिए Didi एक चने जितनी छोटी हो जाती है, और Ppuri के साथ पेट की भूलभुलैया में नीचे उतरती है।
मुँह से पेट, और आँतों तक — खाना कहाँ जाता है और कैसे बदलता है, हर सुराग का पीछा करते-करते आख़िर उस गुड़गुड़ की आवाज़ का राज़ पकड़ में आ जाता है।
गुड़गुड़, यह आवाज़ आख़िर कहाँ से आ रही है?
गुड़ड़गुड़—
मैं चुपचाप अपना स्नैक चबा रही थी कि कहीं से एक अजीब-सी आवाज़ आई।
मैंने इधर-उधर देखा। पर कमरे में तो मेरे सिवा कोई नहीं है?
फिर एक बार और, गुड़गुड़। मैंने धीरे से पेट पर हाथ रखा, तो आवाज़ ठीक वहीं से आ रही थी।
सोचो ज़रा, मेरे पेट से ऐसी आवाज़ आ रही थी मानो अंदर कोई रो रहा हो।
दर्द भी नहीं हो रहा, फिर ऐसा क्यों? कहीं अभी-अभी खाया स्नैक अंदर लुढ़क-लुढ़क तो नहीं रहा?
और मैं तो ऐसी हूँ कि कुछ जान लेने की उत्सुकता हो तो रुक ही नहीं पाती। मैंने ख़ुद ही आवाज़ के मालिक को ढूँढ़ने की ठानी।
चने जितनी छोटी होकर, पेट की भूलभुलैया के अंदर
मैंने WAGZAK JUMP में "गुड़गुड़ करता पेट का सफ़र" खोला।
पौधों के डॉक्टर Ppuri हाथ हिलाकर स्वागत करते हैं। "नमस्ते, नन्ही खोजकर्ता! आज हम चने जितने छोटे होकर पेट की भूलभुलैया की खोज करेंगे।"
चना? और सचमुच मुझे लगा मेरा शरीर सिकुड़ रहा है, फिर आँखों के आगे सब घूम गया—
होश में आई तो ख़ुद को एक लंबी, फिसलनी फिसलपट्टी के मुहाने पर खड़ी पाया।
"Ppuri, मेरे पेट से बार-बार गुड़गुड़ की आवाज़ आती है। यह जानने की उत्सुकता में आई हूँ कि यह क्या है।"
Ppuri बस मुस्कुरा भर दिए। "तो चलो आवाज़ के पीछे-पीछे नीचे चलते हैं। क्योंकि खाने का रास्ता ही आवाज़ का रास्ता है।"
आवाज़ का पीछा करता जासूसी खेल — चलो शुरू हो जाएँ!
पहला सुराग — मुँह में बारीक टूटता और नरम होता खाना
मैंने ऊपर देखा, तो बहुत ही विशाल दाँत कड़-कड़ खाने को तोड़ रहे थे।
"सबसे पहला पाचन यही है — दाँतों से खाने को बारीक तोड़ना।" Ppuri ने बताया।
जीभ भी खाने को इधर-उधर लुढ़काकर लार के साथ मिला रही थी।
लार लगते ही जो खाना सख़्त था, वह धीरे-धीरे नरम और गाढ़ा होने लगा।
"ऐसे नरम होना ज़रूरी है ताकि फिसलपट्टी से सरककर आसानी से नीचे जा सके।" Ppuri की बात पर मैंने सिर हिलाया।
पर यह तो अजीब है। यहाँ तो बस चबाने की आवाज़ है, वो गुड़गुड़ वाली नहीं। लगता है आवाज़ का मालिक और भी नीचे है।
दूसरा सुराग — ग्रासनली की फिसलपट्टी से सर्र
गटक। जैसे ही खाना निगला गया, हम भी उसी के साथ बह गए।
पतली और लंबी नली फिसलपट्टी की तरह आगे-आगे फैली हुई थी, और यही ग्रासनली है।
यह वह रास्ता है जो मुँह और पेट को जोड़ता है।
"ओ हो हो, बहुत तेज़ है!" मैंने हाथ ऊपर उठाकर सर्र से नीचे की ओर फिसली।
नली लहरा-लहराकर हमें नीचे की ओर धकेलती है। कितना अनोखा!
उस सिरे पर किसी बड़े कमरे जैसा कुछ दिख रहा है। Ppuri ने इशारा किया। "हम पेट के लगभग पास पहुँच गए!"
तीसरा सुराग — पेट लहराया, आख़िरकार आवाज़ की डोर पकड़ ली
जैसे ही पेट के अंदर घुसी, तो दीवार चारों ओर झुर्रियों से भरी, सिकुड़ी हुई थी।
"ज़रा यह दीवार देखो, कितनी टेढ़ी-मेढ़ी है!" मैं चकित हुई तो Ppuri ने समझाया।
"जब खाना नहीं होता तो झुर्रियाँ मुड़ी रहती हैं, और खाना आते ही पूरी तरह फैल जाती हैं। तब यह बीस गुना से भी ज़्यादा बड़ा हो सकता है।"
सचमुच खाना आते ही झुर्रियाँ फैलीं और कमरा एकदम चौड़ा हो गया। तो पेट अपना आकार जैसे चाहे बदल लेता है।
तभी, हमारे पैरों के नीचे की ज़मीन लहराई, छत लहराई। पूरा पेट लहर-लहर हिलने लगा।
"अरे बाप रे, Ppuri! लगता है पेट हमें ही निगल जाएगा!"
Ppuri खिलखिलाकर हँसे। "घबराओ मत, यह पेट की हलचल है। पेट लहर-लहर हिलते हुए पाचक रस और खाने को एकसार मिलाता है।"
दीवार से रिसता पाचक रस खाने के साथ घुलमिल जाता है, और यह रस खाने के अंदर के हानिकारक कीटाणुओं को भी ख़त्म करता है और पाचन में भी मदद करता है।
उसी पल, चारों ओर से गुड़ड़गुड़— वही जानी-पहचानी आवाज़ गूँज उठी।
हाँ, बिलकुल यही है! वही आवाज़ जो अभी मेरे पेट से आ रही थी!
यह तो पेट के मेहनत से लहराने की आवाज़ थी। आख़िरकार आवाज़ का मालिक पकड़ लिया!
आवाज़ एक जगह से नहीं थी — बेहद लंबी छोटी आँत
पाचक रस में अच्छी तरह मिले खाने के पीछे-पीछे, हम भी अगले रास्ते पर नीचे उतरे।
पर इस रास्ते का तो कोई अंत ही नहीं दिख रहा।
"Ppuri, यह आख़िर कितनी लंबी है?" टेढ़ी-मेढ़ी मुड़ी नली बेहिसाब, अंतहीन फैली जा रही थी।
"यह छोटी आँत है। अगर सीधा करके नापो तो इंसान की ऊँचाई से पाँच गुना लंबी होती है।" पाँच गुना! मेरा मुँह हैरानी से खुला रह गया।
फिर यह छोटी आँत भी पेट की तरह लहर-लहर हिलने लगी। और फिर से गुड़गुड़ की आवाज़ आई!





















